
सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम की सयुंक्त रुप से IDBI में 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसमें से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी चालू विनिवेश कार्यक्रम के तहत बिक्री के लिए तय की गई है, DIPAM के सचीव अरुणीश चावला ने बताया की योग्य खरीदारों द्वारा की जा रही ड्यू डिलिजेंस लगभग पूरी हो चुकी है।
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DIPAM के सचीव अरुणीश चावला ने संकेत दिया की अगला कदम यानी RFP इस वित्त वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा, इस खबर के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, और शेयरों में काफी तेजी देखी गई है,
सरकार और LIC की है बड़ी हिस्सेदारी
IDBI बैंक की रणनीति बिक्री, जिसमें सरकार और LIC की सयुंक्त रुप से 94 प्रतिशत से अधिक हिसेदारी है, सरकार के निजीकरण कार्यक्रम के लिए एक परीक्षण के रुप में देखा जा रहा है, बता दें, की केंद्र के पास वर्तमान में IDBI बैंक में 45.48 प्रतिशत, और LIC के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है, खरीदार बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी हासिल करेगा, जिसमें सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और LIC 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, कुल मिलाकर, IDBI बैंक की इक्विटी शेयर पूंजी का 60.72 प्रतिशत हिस्सा होगा, साथ ही प्रबंधन नियंत्रण भी खरीदार को सौप दिया जाएगा।
क्या है और डिटेल
इसके साथ ही सरकार ने कुछ सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों और LIC सहित सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में बिक्री प्रस्ताव के माध्यम से हिस्सेदारी कम करने की तैयारी शुरु कर दी गई है, सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचकर इसे निजी निवेशकों के लिए खोलना चाहती है, जैसे -जैसे यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, बाजार में बैंक की वैल्यूएशन और भरोसा और मजबूत हो सकता है।
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शेयर में क्यों आया तूफान
बैंक ने जब से निजीकरण का अपडेट दिया है तब से शेयर काफी उछल चुके हैं लेकिन बता दें इससे पहले कुछ दिनों में शेयर में काफी उतार चढाव दिखाई दिया है, शेयर में इन दिनों भी बढ़ोतरी हो रही थी, बीएसई शेयर में भारी ट्रेंडिंग वॉल्यूम रहा और लगभग 20.83 लाख शेयरों का कारोबार हुआ, यह आंकड़ा दो हफ्ते के औसत 3.20 लाख शेयरों के लेन -देन वॉल्यूम से कहीं ज्यादा था, इस शेयर पर कुल 20.04 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ, जिससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 1,04,954.20 करोड़ रुपए हो गया।